Tuesday, 29 November, 2011

हमें वोट दो

मैं ऐलान करता हूँ कि
अब से रातों को नहीं डूबा करेगा सूरज 
कौवे साइकिलों से नदी पर तैरा करेंगें 
औरों के फटे में टांग नहीं घुसाया करेगा अमेरिका 
मर्द बच्चे आगे से औरतों को सताया नहीं करेंगे 
आग पीकर अमर हो रहेंगे हिजड़े 
कुत्ते पूँछ से तबला बजाया करेंगे 
मैं ये भी ऐलान करता हूँ कि 
घास की नोकों पर उगेंगे कटहल 
कुछ भी खा पी सकेंगे कम्प्यूटर 
छप्परों पर ऊँट खेलेंगे कबड्डी 
बिल्लियाँ खांसती रहेंगी निरंतर 
और ये भी कि 
सूअरों को हंसना माना होगा 
सर्वोत्तम आभूषण चना होगा 
क्यों?
क्या कहते हैं आप?
कि मेरा दिमाग फ़िर गया है ?
लेकिन जब कुछ ऐसा ही अनर्गल 
किसी चुनावी सभा में मंच का भोंपू 
टांय टांय करता हुआ हर किस्म के रंगों में
कितना कुछ वमन करता रहता है 
तब?

Monday, 14 November, 2011

बच्चों से

माना वो आग उगलता है 
लेकिन वही रौशनी देता है 
सूरज से जलना मत सीखो 
सीखो सबको रोशन करना 
अच्छाई तो देखो शूलों की 
वे करते हैं सुरक्षा फूलों की
काँटों से चुभना मत सीखो 
सीखो सबकी रक्षा करना 
हाँ बढ़कर उत्पात मचाता है 
हरियाली भी वही तो लाता है 
पानी से डुबाना मत सीखो 
सीखो सबकी प्यास बुझाना 
माना वो तूफ़ान उठाता है 
उसका साँसों से भी नाता है 
विध्वंस हवा से मत सीखो 
सीखो सबको जीवन देना
जीवन हर पल अवसर देगा 
सभी राह आगे कर देगा
बुराई किसी से मत लेना 
सबसे अच्छाई चुन लेना 



(बाल दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएँ)

Tuesday, 8 November, 2011

कब तक हो

आह वो बचपन
गर्मी की छुट्टियों की
घमासान मस्ती भरे 
नानी के घर के दो महीने
दिनभर शरारतें धमाचौकड़ी
रात खुले आकाश तले छत पर
भूतों की कहानियाँ
आस पड़ोस के लोगों का मिलने आना
अक्सर पूछते वे
कब तक हो
तीस जून की वापसी का रेल टिकट
उतर आता आँखों में
और मन में निराशा का एक पल
बरसों बाद अब 
जब आता है जन्म दिन
याद आ जाता है तीस जून का टिकट
और जब कहते हैं लोग मुझसे
जन्म दिन मुबारक हो
मुझे लगता है कोई पूछ्ता हो जैसे
कब तक हो