मेरा चैन खो गया था
अपनी जेबों मे तलाशा
अल्मारियों मे देखा
बिस्तर के नीचे
कमरों के कोनो मे
गलियारों मे
और फ़िर
रास्तों बाजारों
नदियों पहाड़ों
मन्दिरों मस्जिदों मे
सारा गाँव इकट्ठा
खूब शोर
एक पागल के चैन मे खलल पड़ा
चिल्लाकर बोला
अपने भीतर क्यों नही देखता है
मैने अनसुना कर दिया
लगा रहा खोज में
लोग चकित ऒर उत्सुक
कहने लगे कि देख भी लो
अपने भीतर एक बार
चिल्लाकर कहा मैने
नहीं कभी नहीं
वहीं तो है एक आखिरी उम्मीद
अगर वहाँ देखा मैने
और
न पाया तो !
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Thursday, 5 November 2009
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