कोई परेशानी है तो सिर्फ़ ये
कि अभी अनुभव ही नहीं किया तुम्हारा
छू लूँगा तुम्हे कभी
दबा के हाथ छेड़ूँगा
उफ़ कैसी होगी तुम छूने में
महक तो तुम्हारे बालों की
पागल कर देती है अक्सर
तुम्हारी कमर पकड़ के उठाया था बेन्च से
तो सिहर गया था मैं
तुम्हारी गहरी आँखे
तुम्हारी इतनी प्यारी बातें
और क्या चाहिये होगा मुझे
फ़िल्म देखते समय अँधेरे में सोचता हूँ
एक ही कमरे मे जब अँधेरा होगा
तो पूरी रात भी यकीनन कम पड़ेगी
मै नहीं जानता था
कि मुझे नहीं अच्छा लगेगा
लिप्स्टिक का स्वाद
मुझे ये भी कहाँ पता था
कि तुम्हारे कान की बाली
मेरी पीठ के नीचे दबी मिलेगी
कुछ बातें सचमुच अनुभव की ही होती हैं
अब ये तो स्वप्न मे नहीं सोच सकता था
कि तुम पास मे होगी और
मै तुम्हारी ओर पीठ करके सो रहा होऊँगा
तुम मुझे अच्छी बहुत लगती हो
पर मैं सोते वक्त नहीं चाहता कि
किसी का हाथ मेरे ऊपर हो
वैसे अगर दो चार रोज़ मे ही
वैक्सिंग के बाद चुभने लगते हैं बाल
तो क्या तुम थोड़ा जल्दी जल्दी
कर सकती हो वैक्सिंग
हाँ देखता हूँ कि
इससे स्किन पर होता है कुछ
चलो छोड़ो
अनुभव भी न
कितने भरम खोल देता है अक्सर
अब जैसे मैने अपने सभी दोस्तों से
कहा था कई बार कि
तुम्हारे बाल नेचुरली कर्ली हैं
मै चाहता हूँ कि अब अगर कभी
रात सोने मे देर हो जाये
तो हम लोग सो ही जाया करें
क्या रोज़ रोज़...
आफ़िस के लिये उठना भी होता है
वाह रे अनुभव
अभी तो सिर्फ़ कुछ महीने ही हुये हैं
अभी तो बच्चे होंगे
फ़िर
उनकी देख रेख में तुम शायद
अपने बालों को
ऐसा ना भी रख सको
और कुछ समय बाद तो
स्किन धीली सी भी हो जायेगी न
अनुभव
कभी कभी न भी हो तो कोई बात नहीं
कुछ मिठास कुछ छ्टपटाहट बनी ही रहे
कुछ अनुभव की तमन्ना ही रहे तो भी
बुरी बात नहीं शायद
अब ये कोई नई परेशानी पल रही है शायद
निजात नहीं परेशानियों से
और न ही अनुभव से
Showing posts with label Poem Hindi हिन्दी कविता अनुभव. Show all posts
Showing posts with label Poem Hindi हिन्दी कविता अनुभव. Show all posts
Thursday, 10 December 2009
Subscribe to:
Posts (Atom)
