मरी गाय को
कच्चे माल की तरह देखता है मोची
सम्भावित आमदनी की तरह देखता है पुजारी
भोजन की तरह देखेती हैं चीलें
बोझ की तरह देखते हैं सफ़ाईकर्मी
नुकसान की तरह देखता है ग्वाला
मुझे आँकते वक्त तुम देख सकते हो
मेरे जूते
मेरा चेहरा
मेरी पढ़ी हुई किताबें
मेरा पसन्दीदा भोजन
और भी बहुत कुछ
ये देखना तुम्हारे बाबत खबर देगा बहुत कुछ
मेरी तुम्हे शायद ही कोई खबर मिले
Showing posts with label Poem Hindi हिन्दी कविता द्रष्टिकोण. Show all posts
Showing posts with label Poem Hindi हिन्दी कविता द्रष्टिकोण. Show all posts
Sunday, 10 January 2010
Subscribe to:
Posts (Atom)
