ये गलतफ़हमी दूर कर लो कि
अनुयाई चलते हैं नेता के पीछे
केवल दिखता भर है ऐसा
बात कुछ यूँ है कि
नेता की आँखें होती हैं पीछे को
दिखती नहीं हमे ये और बात है
और ये भी कि आगे वाली तो हैं नकली
जैसे हाथी के दाँत
न मानो तो जरा सोचो
कौन नेता ले जाता है आगे
समाज को
देखता ही नहीं आगे को
तो ले कैसे जायेगा आगे
खैर तो मामला ये कि
नेता वो
जो देख लेता है
किधर जा रही है भीड़
और फ़िर चल पड़ता है उसके आगे आगे
मुड़े भीड़ बांये तो बांये दांये तो दांये
अड़चन ही नहीं
आँखें जो हैं पीछे को
तो ये हैं कलजुगी नेता
और कहीं अगर असली हो नेता
क्या पड़ी उसे कोई पीछे है कि नहीं
आगे को आँख है
आगे को देखता है
आगे को चलता है
और तब बढ़ता है
आगे को समाज
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Sunday, 21 February 2010
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