रहस्यों को खा रहा हूँ
मै आजकल
पी डालता हूँ आशंकाओं को
पहन के घूमता हूँ सपने
बिछा के लेट रहता हूँ यथार्थ
पहाड़ उठा के फ़ेक दिया है
अनिश्चितता का
छाती से
घूम के आया हूँ सारा आकाश
लगा के पंख संभावनाओं के
संवेदना की तलवार भाँजता हूँ
विडम्बनाओं की लोभनीय
तस्वीरें उतारता हूँ
सुहावनी अनुभूतियों की
ललकार पे खड़ा हो जाता हूँ
अन्तरतम की वास्तविकता पर
तैल चित्र बनाता हूँ
कभी कभार
मुझे तुमसे काटता है
व्यापक मौन
दोनो टुकड़ों में दिखता नहीं
मै कौन तुम कौन
इसी गड्डमड्ड में
अब आया चैन
Showing posts with label Poem Hindi हिन्दी कविता लगन प्रेम प्यार. Show all posts
Showing posts with label Poem Hindi हिन्दी कविता लगन प्रेम प्यार. Show all posts
Friday, 18 December 2009
Subscribe to:
Posts (Atom)
