लगता है ये सिर्फ़ मेरा खयाल ही है
कि तुम्हारे दिवास्वप्नो तक है मेरी पहुँच!
कि कल मिल जायेगा वह सब कुछ
अनगिनत कल बीत गये जिसकी तमन्ना में!
कि हद से बढ़कर दवा बनता है दर्द!
कि ये दुनिया सिर्फ़ गम ही गम नही है मज़ाज़ का!
अगर ये तय हो जाये कि ये मेरा खयाल ही है
तो भी क्या!
फ़िर फ़ूटेंगें नई तमन्नाओं के अंकुर
मेरे खयालों में.
ऐसा ही हुआ है
युगों युगों से आज तक
जब से मै हूँ.
खयालों के कल आज और कल
खयालों के सुख दुख
खयालों में लेन देन
खयालों की सुबहें शामें रातें
खयालों के रिश्ते
उफ़ ये ज़िन्दगी है भी
या महज़ खयाल है!
मैं सोचता हूँ कि
पा जाउँगा एक राह कभी
जो ले जायेगी मुझे
एक हकीकत की नदी तक
जिसमे मै सारे खयालों को डुबो दूँ
हे भगवान!
यह भी महज़ एक खयाल ही न निकले!!
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Monday, 14 December 2009
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