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Friday, 24 August 2007

सीधे रास्ते

यूहीं कुंदन नहीं बनोगे
कड़ी आंच मे तपना होगा
उसकी आस छोड़नी होगी
तब जाकर कोई अपना होगा
सिर्फ सब्र से फल न मिलेगा
कुछ लगकर के करना होगा
मंज़िल हरदम दूर रहेगी
ख़ुद उठकर के चलना होगा
सूरज गया अँधेरा देकर
किसी दिए को जलना होगा
सपने सच तो हो जायेंगे
काम मगर कुछ करना होगा
स्वर्ग नही मिलता धरती पर
उसके लिए तो मरना होगा
तुम समझे वह अपना होगा
जागी आँख का सपना होगा
गिरकर भी जो बड़ा हो गया
देख के आओ झरना होगा
गलत राह पर नही किसी से
ख़ुद से मगर तो डरना होगा
जीवन खुशियों से भर जाएगा
प्रेम सभी से करना होगा