Saturday, 22 October, 2016

छोटे बड़े भिखारी

भिखारी का कोई दीन धरम नहीं होता 
मंदिर मस्जिद गिरजा गुरुद्वारा या मदिरालय 
कहीं भी मांग लेता है 
उसकी कोई जात बिरादरी भी नहीं होती
हिन्दू मुस्लिम इसाई या फिर अधर्मी 
किसी से भी मांग लेता है 
बाकी और लोग 
जो अपने को भिखारी नहीं समझते 
एक ही जगह जाते हैं मांगने 
हर बार जब भी कुछ चाहिए 
मिले न मिले 
मंदिर तो मंदिर मस्जिद तो मस्जिद 
और कुछ नहीं भी जाते कहीं मांगने 
जहाँ बैठे वहीं मांग की जप चलती रहती रहती है 
इस मामले में हम सब ज्यादातर लोग 
बहुत संकुचित भिखारी नहीं हैं क्या ?