Saturday 18 May 2013

मीलों हमें जाना है

अभी तो शुरू किया है सालों हमें खाना है 
मीलों हम आ गए मीलों हमें जाना है 
एयर इन्डिया को धूल चटा दी 
रेल की हमने पेल मचा दी 
चोर डकैत सब सकते में हैं 
लूट की ऐसी झड़ी लगा दी 
हमें जरूरत क्या है दुश्मन मुल्कों की 
ये देश हमारा है और हमीं को मिटाना है 
मीलों हम आ गए मीलों हमें जाना है 
हमने टूजी थ्रीजी खाया 
कोयला खाया लोहा खाया 
पीहर से हेलीकाप्टर आया 
उसमे भी खाया खूब खिलाया 
सुरसा जैसी भूख हमारी हमें तो खाना है 
मीलों हम आ गए मीलों हमें जाना है 

Friday 17 May 2013

कभी तो

और भी घना होगा अन्धेरा तो क्या
कभी तो कटेगी ये बियाबान रात
निकलेगा कभी तो यहाँ भी सूरज 
कभी तो बस्तियों मे उजाला होगा
और भी कुछ होगा कफ़न के सिवा 
पहनने को ज़िंदा लाशों के तन पर 
अनगिनत मासूम इंसानों के बच्चे 
रह गए आज सिर्फ कंकाल बन कर 
कहीं घूरों पे कुत्तों से टुकड़ों की झडपें 
अस्पतालों के बाहर दवाई को तड़पें 
खाने को केवल जिन्हें गम हैं अभी   
उनके भी हलकों में निवाला होगा 
कभी तो बस्तियों मे उजाला होगा