Tuesday, 26 April, 2011

बोलो विकिलीक्स बाबा की जय!

हर दफ्तर में लूट मची है देश का बज गया बाजा
स्विस बैंको में नोट भर रहे मंत्री हो या राजा
जो कुछ जिसके हाथ लग गया सारा लूट गया
हर नेता और अफसर का अब भांडा फूट गया
बोलो विकिलीक्स बाबा की जय!

पहन के टोपी हाथ जोड़ के घर घर मांगे वोट
हथियाके पावर जनता के पिछवाड़े मारे चोट
ओ भूखे मरने वालों देखो इनको पहचानो
फूल नहीं सर पर इनके अब तो जूते तानो
गांधी के सपनों का भारत तो पीछे छूट गया
हर नेता और अफसर का अब भांडा फूट गया
बोलो विकिलीक्स बाबा की जय!

शर्म नहीं है लाज नहीं है इनका कोई इलाज नहीं है
कैंसर की बीमारी है ये छोटा मोटा खाज नहीं है
देश को अपनी माता कहते नोंच नोंच खाते उसको
गिद्ध जमा हैं संसद में सब देखो चाहे जिसको
सोचो एक कपूत जो अपनी माँ को लूट गया
हर नेता और अफसर का अब भांडा फूट गया
बोलो विकिलीक्स बाबा की जय!

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