Friday 9 December 2011

भूत प्रेत और चुड़ैलें

भयानक घुप्प अँधेरा सांय सांय हवा 
बिजली जैसी चमकती हर रंग की तेज रोशनियाँ 
अजीब अजीब आवाजें 
पी के शराब बोटियाँ नोंचते हड्डियाँ चबाते 
नाचते हैं रातों को भूत प्रेत और चुड़ैलें 
ऐसे डराते थे कुछ दुष्ट लफंगे औरों को 
बस्ती के ज़रा बाहर पेड़ों के एक छोटे से झुरमुट के बारे में
जहाँ रात पीपल तले चिलम पीते हुये कर सकें वे सब हंसी ठट्ठा 
और लूट भी लें गाहे बगाहे मिल जाये कोई भूला भटका 
फूल गया शहर साफ़ हो गया पेड़ों का झुरमुट 
ईंट गारा धूल मिट्टी सरिया लकड़ी चौखट पत्थर 
इधर उधर ऊपर नीचे करते 
सुपरवाइजरों के इशारों पर नाचते 
गाली धमकी घुड़कियाँ खाते कामगार 
आरे वेल्डिंग मिक्सर कटिंग दिन रात
अजीब अजीब तेज तेज आवाजें 
तेज तेज रोशनियाँ धूल के गुबार 
नाली के किनारे सुलगते चूल्हे रात गए 
हड्डी हड्डी हुई जाती थकी हारी औरतों का मांस अगर बचा हो
तो नोंचते पव्वा भर पीकर 
डेढ़ पसली लिए प्रेतों जैसे दिखते मरद उनके 
बन जायेगी जब ये बिल्डिंग खूब बड़ी और ऊँची 
सुना है खुलेगा इसमें एक शानदार डिस्क 
नृत्य बोटियाँ शराब पार्टी ड्रग्स 
अजीब अजीब आवाजें 
रंग रंग की तेज रोशनियाँ 
देर रात गए अंधेरों में 

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