Thursday 8 September 2011

लोक का अलौकिक तंत्र

सूखे में बरबाद होना है या कि बाढ़ में
भूख से मरना पसंद है आपको
या कि इलाज के अभाव में
रेल दुर्घटना में भी मरने की सोच सकते हैं आप
किसी मंदिर की रेलमपेल में भी हो जाएगा ये काम 
घायल होकर अपाहिज होना  हो तो इतने तरीके उपलब्ध हैं 
कि गिनाए ही न जा सकें 
जो चाहो चुन लो अपने परेशान होने की वजह
सारे विकल्प खुलें हैं
आपकी बेटी का रेप हो सकता है
या आपके बेटे का इनकाऊंटर
या फ़िर आत्महत्या भी कर सकती है आपकी बीवी 
गरीबी की लाचारी में 
चुनाव आपका है
स्वतन्त्र हैं आप चुनने को
कच्ची देशी जहरीली शराब 
बच्चों के स्कूलों में जहरीला दलिया
विषाक्त दूध फल सब्जियां 
नकली दवाएं म्लेच्छ पानी 
आपको बेकार में अपना दिन बरबाद करना है 
बहुत सुविधाएँ है 
किसी कचहरी में अर्जी को चले जाइए 
राशन के दफ्तर या फ़िर 
जन्म मृत्यु कार्यालय में 
अपने मरे बाप का सर्टिफिकेट लेने पहुँच जाइए 
आपको अपना खून जलाने का शौक है
इनकम टैक्स का दफ्तर है
नगर निगम का अद्भुत कार्यालय है 
बैठे ठाले आ बैल मुझे मार का मन हो आये तो 
पुलिस तो खैर है ही 
सेवा में तत्पर सदैव 
अनगिनत सेवायें हैं 
अनगिनत विकल्प हैं 
सतपुड़ा निवासी नेता आपकी गर्दन पर सवार होकर
आपकी जेब से खींचे आपकी गाढ़ी कमाई का रुपया 
या फ़िर गंगा किनारे वाला सफेदपोश शातिर गुंडा नेता  
तमाचा मार के आपके मुंह से निकाल ले निवाला  
खूब विकल्प हैं 
खूब चुनने को है 
मस्त हैं राजा
परजा की ऐसी तैसी है 
अजब तमाशा है
गजब डेमोक्रेसी है

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