Monday 5 April 2010

धारणायें

रंगीन चश्मे से देख कर
वो बनाता रहा
एक खूबसूरत तैल चित्र
एक शान्त सुन्दर बड़ी गहरी नीली झील
पीछे थोड़ी दूर तक फ़ैले
हरे मैदान
और फ़िर उसके पीछे
ऊँचे खड़े सलेटी भूरे और हरे रंगो वाले पहाड़
सामने इस तरफ़ पास
एक छोटा सा घर
और इसके दालान में
दो बिल्लियों के साथ खेलते
छोटे बच्चे
जो बन पड़ा
वो यकीनन अपने रंग मे न था
और फ़िर देखा गया उसे
और और रंगीन चश्मो से
ये झील
पीछे के मैदान और पहाड़
सामने खेलते बच्चे और बिल्लियाँ
कालांतर मे
रूप लेती है एक कविता का
एक कवि के शब्द जाल में कैद होकर
यकीनन ये अब एक मिथक भर था

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