Tuesday, 6 April, 2010

अतिप्रश्न

प्रेम तपस्या है
प्रेम जीवन है
प्रेम ईश्वर है
तमाम लोग तमाम बातें
पूछो प्रेम क्या है
हर कोई तैयार बताने को
कवि गण सबसे आगे
इस सवाल का जवाब
चाहे कुछ भी हो
जक तक जवाब है
जाना नहीं समझो
हमसे पूछे कोई
हम तो न बता पायेंगे

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