Sunday 28 February 2010

खोज

खोज जारी है
कभी किताबों मे
कभी पहाड़ों पर
खोज ले जाती रही मंदिरों तक
बाज़ारों तक
दोस्तों की महफ़िलों तक
बिस्तरों पर खोजते रहे
और रसोईघरों में भी
खूबसूरत बगीचे देख डाले
और बियाबान जंगल भी
कभी अस्पतालों मे भी देखा
कभी किसी की आँखों मे
न सागर तट बच पाये खोज से
न दरिया की मौजें
लोगों के गीतों मे तलाशा
अपनों के आँसुओं मे झाँका
बहुत देर हुई
खोज जारी है
और अब तो ढूँढते हैं आईना
कि ये तो देख सकें
कि कौन खो गया है

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