Tuesday 3 July 2012

बड़े बड़े आदमी

बैठा है सूखे खेत में मुंह उठाये

ताकते टुकुर टुकुर ऊपर

बादल तो नहीं अलबत्ता

नेता जरूर घूम रहें हैं दौरे पर

दूर पूरब में सुना है पानी ही पानी

भर गएँ हैं घर दुवार

उफान पे है दिबांग

विकट समस्या है

गरीब गुरबा बड़ा परेशान

और यहाँ खेती सब हुई जा रही है बेकार

पानी ही नहीं है

बड़े बड़े आदमी हैं दिल्ली में

साहब मंत्री नेता लोग सब

काहे नहीं भर के चुल्लू आसाम से

उर्रा देते हैं महाराष्ट्र और यम पी में

और फिर दुई चार बादल फूंक मार के

उड़ा लावें बम्बई से दिल्ली तक

बड़े लोग हैं और बहुत सारे भी हैं

एक एक अंजुरी भी भी डाल दें

तो सबका काम हो जाए

क्या कहते हो नहीं कर सकते !

क्यों ?

इत्ते बड़े हाथ पैर नहीं है

गरीब गवारों और किसानो की मदद के लिए !

खाली पेट ही बड़ा है बस

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